जय हिंद दोस्तों एक बार फिर से आपका स्वागत है vandebharat.site पर, आज हम बात करने वाले हैं biography of dr. sarvepali radhakrishan in hindi

तो दोस्तों जैसे कि आपको पता ही है कि 5 सितंबर 2021 को आज पूरा भारत dr. sarvepali radhakrishan की याद में teachers day मना रहा है

भारत में यूं तो काफी त्योहार मनाए जाते परंतु teachers को एक ऐसा सम्मान देकर त्योहार मनाना बहुत बड़ी बात है

तो आपको teachers day की बहुत-बहुत बधाइयां हो, तो चलिए दोस्तों बिना किसी देरी के शुरू करते हैं biography of dr. sarvepali radhakrishan in hindi

Dr. servepali radhakrishnan early life,biography of dr. sarvepali radhakrishan in hindi

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1818 को भारत के मद्रास के तिरूथनी गांव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था | डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पिता का नाम सर्वपल्ली वीरासमियाह और माता का नाम सीतामा था |

उनके पिता राजस्व विभाग में काम करते थे | उनके पिता के ऊपर बड़े परिवार का भरण पोषण का दायित्व था|

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 5 भाई और एक बहन थी जिसकी वजह से बहुत ही बड़ा परिवार था परिवार का भरण पोषण करने के लिए विराज स्वामी को बहुत ही कठिनाइयों से गुजरना पड़ता था |

biography of dr. sarvepali radhakrishan in hindi

School life / education period

सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपने बचपन में धार्मिक स्थलों पर ज्यादा समय व्यतीत करते थे, वे अपना अधिकतम समय धार्मिक स्थलों पर बैठकर ही बिताते थे | उनके पिता एक मंदिर में पुजारी पुजारी थे इसलिए डॉक्टर राधाकृष्ण भी मंदिर में ही ज्यादा समय व्यतीत करते थे और भाई से भी काफी ज्ञान अर्जित किया उन्होंने |

उनके पिता पुराने संस्कृति की होने के बावजूद भी उन्होंने अपने बेटे को स्कूल पढ़ाई के लिए भेजा उनकी सबसे पहले स्कूल का नाम था क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लोथल मिशन स्कूल, तिरुपति | वहां पर 4 साल पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अपने अगली पढ़ाई वेल्लूर में की उसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई की |

फिर उन्होंने स्वामी विवेकानंद और अन्य महान हस्तियों के विचारकों का अध्ययन किया और उनकी जीवनी पढ़ी | सन 1902 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपनी मैट्रिक पास की और वहां से छात्रवृत्ति भी हासिल की थी | अध्ययन काल के जीवन में मेधावी रहे थे |

उस समय में मैट्रिक के बाद सीधा स्नातक डिग्री हुआ करता था दोनों ने अपनी शान तक डिग्री कला संकाय में की सन 1905 मैं | उन्होंने मनोविज्ञान इतिहास और गणित विषय में विशेष योग्यता की टिप्पणी भी उच्च प्राप्त अंकों के कारण मिली |

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1918 में मैसूर महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए | डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को भारतीय दर्शनशास्त्र से परिचित करवाया और पूरे विश्व में उनके लेखों की प्रशंसा की गई |

विवाहित जीवन ,biography of dr. sarvepali radhakrishan in hindi

उस समय ब्राह्मण परिवारों में कम उम्र में ही विवाह करवा दिया जाता था जिसकी वजह से 8 मई 1903 को डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिवा कामू के साथ विवाह करवा दिया गया था | जिसमें उनका विवाह हुआ था उस समय वह मात्र 14 साल के ही थे और उनकी पत्नी की आयु मात्र 10 वर्ष की थी |

उसके बाद 3 वर्ष बाद उनकी पत्नी ने उनके साथ जीवन बिताना शुरू कर दिया था | उनकी पत्नी भी पढ़ने लिखने में काफी अच्छी थी | सन 1908 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिवा कामु के पुत्री हुई जिसका नाम उन्होंने सुमित्रा रखा |

राजनीतिक जीवन

1947 से 1949 तक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य रहे थे | उसी समय के सात वह विद्यालयों के चेयरमैन भी नियुक्त किए गए थे |

उसके बाद सन् 1952 में राधा कृष्ण को उपराष्ट्रपति निर्वाचित किया गया | उपराष्ट्रपति के रूप में राधाकृष्णन है राज्यसभा में अध्यक्ष का पदभार भी संभाला |

Why teachers’Day is celebrated on dr sarvepalli Radhakrishnan birthday?

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के द्वारा भारत को बहुत कुछ देने और एक टीचर होने के नाते उनके जन्मदिवस पर 5 सितंबर को हर वर्ष भारत में teachers day मनाया जाता है and celebrateed Why teachers’Day is celebrated on dr sarvepalli Radhakrishnan birthday.

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को सन 1954 मैं डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा भारत रत्ना से सम्मानित किया गया था |

  • सन् 1931 से 36 तक आंध्र विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे।
  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में 1936 से 1952 तक प्राध्यापक रहे।
  • कोलकाता विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में 1937 से 1941 तक कार्य किया।
  • सन् 1939 से 48 तक  काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चांसलर रहे।
  • 1953 से 1962 तक  दिल्ली विश्वविद्यालय के चांसलर रहे।
  • 1946 में  यूनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की मृत्यु सन 1975 में हुई थी |

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